हादसे की आंखोंदेखी: लगा जैसे बम फटा हो, हवा में उड़ते हुए घर और स्कूल में घुस गए ट्रेन के डिब्बे
सलीम ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्हें लोगों के रोने, चीखने और बचा लो-बचा लो की आवाजें साफ सुनाई दे रही थीं। गांव के 100 से ज्यादा लोग फटाफट रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए थे।
कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन शनिवार की शाम यूपी में मुजफ्फरनगर के खतौली के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में 23 लोगों की मौत हो गई जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए। हादसे के चश्मदीदों ने उस भयानक मंजर को ना सिर्फ देखा बल्कि हादसे के बाद से सहमे हुए हैं। खतौली के नई आबादी गांव में जहां ट्रेन पटरी से उतरी वहां रहने वाले मोहम्मद सलीम ने बताया कि शाम छह बजे के करीब उन्होंने बम ब्लास्ट जैसी एक आवाज सुनी और रेलवे ट्रेक की तरफ देखा तो ट्रेन के कुछ डिब्बे हवा में उड़ रहे थे और फिर आकर एक दूसरे के ऊपर गिर गए। इनमें से कुछ घरों पर और कुछ बगल के स्कूल पर गिरे।
सलीम ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्हें लोगों के रोने, चीखने और बचा लो-बचा लो की आवाजें साफ सुनाई दे रही थीं। गांव के 100 से ज्यादा लोग फटाफट रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए थे। वे लोग गांव से अपने साथ दो सीढ़ियां और दो खाट लेकर पहुंचे थे। गांववाले घायल यात्रियों को निकाल-निकालकर गांव के ही डॉक्टर मंसूर के पास लेकर जा रहे थे। उन्होंने ही घायलों का प्राथमिक उपचार किया, उसके बाद वहां एंबुलेंस पहुंची और लोगों को अस्पताल ले गई।
हादसे के 6 घंटे बाद आधी रात तक सलीम वहीं घटनास्थल पर ही कैम्प करते रहे और लोगों को मदद पहुंचाते रहे। इस दौरान राहत-बचाव करने आए कर्मियों ने गैस कटर से दुर्घटनाग्रस्त बॉगियों को काट-काटकर घायलों को बाहर निकाला। सलीम ने बताया कि वो यह देखकर बहुत दुखी थे कि अंदर अभी बी बहुत से लोग फंसे हुए थे और दर्द से कराह रहे थे।

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