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इंडि‍या के ऑटो शो में नहीं आना चाहतीं ग्‍लोबल कंपनि‍यां.

इंडि‍या के ऑटो शो में नहीं आना चाहतीं ग्‍लोबल कंपनि‍यां.

नई दिल्‍ली। इंडि‍यन ऑटोमोबाइल इंडस्‍ट्री दुनि‍या में सबसे तेजी से बढ़ने वाली इंडस्‍ट्री में से एक बन गया है। यह भी कहा जा रहा है कि‍ 2025 तक इंडि‍यन ऑटोमोबाइल मार्केट दुनि‍या में तीसरी सबसे बड़ी मार्केट होगी। इसके बावजूद ग्‍लोबल ऑटो कंपनि‍यां सबसे बड़े इवेंट ऑटो एक्‍सपो में नहीं आना चाहती हैं।
कंपनि‍यों और एक्‍सपर्ट्स की माने तो इन ग्‍लोबल कंपनि‍यों के इंडि‍यन मार्केट के लि‍ए कोई ऐसे प्रोडक्‍ट्स नहीं हैं जि‍न्‍हें वह शोकेस कर सकें। इसके अलावा, इवेंट पर करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी कोई खास रि‍टर्न नहीं मि‍लता है। कंपनि‍यों के हि‍साब से यह उनके लि‍ए घाटे का सौदा है। 9 फरवरी से 14 फरवरी तक चलने वाले ऑटो एक्‍सपो 2018 में करीब 7 बड़ी कार कंपनि‍यां हि‍स्‍सा नहीं ले रही हैं।


कंपनि‍यों के पास भारत के लि‍ए नहीं कोई खास प्रोडक्‍ट

आईएचएस ऑटोमोटि‍व एनालि‍स्‍ट ने बताया कि‍ कई कंपनि‍यों के ऑटो एक्‍सपो में शामि‍ल नहीं होने के पीछे एक वजह यह भी है कि‍ इन कंपनि‍यों के पास भारतीय बाजार और भारतीय कस्‍टमर्स के मुताबि‍क प्रोडक्‍ट्स नहीं रहते हैं। ऐसे में केवल फ्यूचर कॉन्‍सेप्‍ट मॉडल्‍स को शोकेस करना फायदे का सौदा नहीं रहता है। यही वजह है कि‍ ज्‍यादातर कंपनि‍यां ऑटो एक्‍सपो से पहले ही अपने प्रोडक्‍ट लाइन अप का ऐलान कर देती हैं।

खर्च का नहीं मि‍लता कोई रि‍टर्न....

कंपनि‍यों के वरि‍ष्‍ठ अधि‍कारि‍यों के मुताबि‍क, ऑटो एक्‍सपो के दौरान होने वाले होने वाले खर्च में केवल जगह बुक करने का खर्च नहीं है। इसमें लेबर, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, इंपोर्ट आदि‍ का खर्च भी रहता है। कंपनि‍यों का जो खर्चा होता है उसका रि‍टर्न उन्‍हें नहीं मि‍ल पाता है। 

इस बार कौन सी कंपनि‍यां नहीं ले रहीं हि‍स्‍सा

9 फरवरी से शुरू होने वाले ऑटो एक्‍सपो 2018 में फॉक्सवैगन ग्रुप की कंपनि‍यां - स्‍कोडा, ऑडी, डुकाटी, मैन, स्‍कैनिया, पोर्चे और लम्‍बोर्गि‍नी हि‍स्‍सा नहीं ले रही हैं। इसके अलावा, जैगुआर, लैंड रोवर, फोर्ड, अशोक लीलैंड, फि‍एट, जीप भी ऑटो एक्‍सपो में मौजूद नहीं रहने वाली हैं। टू-व्‍हीकल कंपनि‍यों में बजाज ऑटो, रॉयल एनफील्‍ड और हार्ले डेवि‍डसन भी हि‍स्‍सा नहीं लेने वाली हैं।

2016 ऑटो एक्‍सपो में भी नहीं आई थीं कंपनि‍यां

बजाज ऑटो और रॉयल एनफील्‍ड ने 2016 ऑटो एक्‍सपो में कहा था कि‍ वह ज्‍यादा कॉस्‍ट होने और उसका बेहद कम रि‍टर्न आने की वजह से इवेंट में हि‍स्‍सा नहीं ले रही हैं। इसके अलावा, स्‍कोडा और फॉक्‍सवैगन ने भी हि‍स्‍सा नहीं लि‍या था।

एक कंपनी पर कि‍तना आता है खर्च

करीब सात प्रोडक्‍ट्स को शोकेस करने वाले एक मीडि‍यम साइज स्‍टॉल के लि‍ए एक कंपनी का कम से कम औसतन 10 करोड़ रुपए का खर्च करना पड़ता है। यह खर्च बजट अलॉट के हि‍साब से 30 करोड़ रुपए तक भी पहुंच जाता है। यहां इंडोर के अलावा आउटडोर डि‍स्‍प्‍ले, प्रमोशन आदि‍ पर भी खर्च करना पड़ता है।

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