startup will not get the benefit of tax rebate स्टार्टअप को नहीं मिलेगा टैक्स छूट का फायदा,
स्टार्टअप को नहीं मिलेगा टैक्स छूट का फायदा, सरकार ने एप्लीकेशन किए रिजेक्ट.
नई दिल्ली. मोदी सरकार ने 400 से ज्यादा स्टार्टअप को टैक्स बेनिफिट देने से इंकार कर दिया है। सरकार ने इन सभी स्टार्टअप के एप्लीकेशन को रिजेक्ट कर दिया है। सरकार को लगता है कि रिजेक्ट हुए स्टार्टअप टैक्स बेनिफिट की क्राइटेरिया पूरी नहीं करती है। इसकी वजह से उन्हें टैक्स बेनिफिट का फायदा नहीं दिया जा रहा है। मोदी सरकार ने देश में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए टैक्स छूट का प्रावधान किया है। जिसके तहत एक अप्रैल 2016 के बाद गठित हुए स्टार्टअप को टैक्स बेनिफिट मिलता है। दिसंबर में हुए इंटरमिनिस्ट्रियल बोर्ड मीटिंग में 407 कंपनियों द्वारा भेजे गए प्रपोजल में से 401 के एप्लीकेशन रिजेक्ट किए गए हैं।
केवल 4 स्टार्टअप को टैक्स बेनिफिट का अप्रूवल
दिसंबर में हुई 21वीं इंटरमिनिस्ट्रियल बोर्ड में केवल 4 स्टार्टअप को टैक्स बेनिफिट के लिए सेलेक्ट किया गया है। जबकि 2 स्टार्टअप के एप्लीकेशन को अगली मीटिंग में फिर से रिव्यू किया जाएगा। इसके अलावा 401 स्टार्टअप के एप्लीकेशन को रिजेक्ट किया गया है। साथ ही मीटिंग में पहले से टैक्स बेनिफिट के लिए रिजेक्ट हो चुके 369 कंपनियों को स्टार्टअप का दर्जा बरकरार रखा गया है।
क्यों रिजेक्ट हो रहे एप्लीकेशन
सूत्रों के अनुसार नियमों के अनुसार एक अप्रैल 2016 के बाद बनी कंपनियों को ही स्टार्टअप का दर्जा मिल सकता है। साथ ही ऐसी कंपनियां ही टैक्स बेनिफिट के लिए अप्लाई कर सकती है। नियमों के प्रति कम जानकारी होने की वजह से कई कंपनियां एक अप्रैल 2016 से पहले गठित होने के बावजूद अप्लाई कर रही है। इसके अलावा स्टार्टअप बेनिफिट लेने के लिए फ्रॉड के भी मामले सामने आए हैं। इन वजहों से ही एप्लीकेशन रिजेक्शन बढ़ा है।
नवंबर की मीटिंग में फ्रॉड का हुआ था खुलासा
स्टार्टअप इंडिया स्कीम के तहत स्टार्टअप कहलाने और उसके तहत टैक्स बेनिफिट जैसी फायदे लेने के लिए कंपनियां एप्लीकेशन देनी होती है। कंपनी के एप्लीकेशन को एक इंटर मिनिस्ट्रियल बोर्ड रिव्यू करता है। जिसके आधार पर उसे स्टार्टअप का दर्जा और टैक्स बेनिफिट जैसे फायदे मिलते हैं। डीआईपीपी के तहत नवंबर में हुई बोर्ड मीटिंग मे इस बात का खुलासा हुआ है कि कई कंपनियां ऐसी हैं जो स्टार्टअप का दर्जा लेने के लिए पात्र नहीं है, फिर भी उन्हें उसका दर्जा मिल गया है। कई कंपनियों ने अपनी सब्सिडियरी बनाकर एक नई कंपनी को स्टार्टअप के रुप में रजिस्टर्ड कराया था। जिसमें भारतीय कंपनियों के साथ-साथ विदेशी कंपनियां भी शामिल हैं। नियमों के अनुसार इस तरह से बनाई गई सब्सिडियरी कंपनी को स्टार्टअप का दर्जा नहीं मिल सकता है। इसका खुलासा होने के बाद उनके एप्लीकेशन रिजेक्ट किए गए ।
स्टार्टअप दर्जा मिलने से क्या मिलता है फायदा
स्टार्टप इंडिया स्कीम के तहत ऐसी कंपनियां को स्टार्ट अप इंडिया का दर्जा मिलता है, जो इन्नोवेशन, नए प्रोडक्ट डेवलपमेंट और सर्विस के लिए काम करती है। इसके तहत कंपनी का गठन 7 साल से ज्यादा पुराना नहीं होना चाहिए।वहीं बॉयो टेक्नोलॉजी सेक्टर की कंपनियों के लिए यह लिमिट 10 साल है। ऐसी कंपनियों को स्टार्टअप का दर्जा मिल सकता है, बशर्ते की उनका टर्नओवर 25 करोड़ रुपए सालाना से ज्यादा न हो। स्टार्टअप का दर्जा मिलने से कंपनियों को लेबर कानून में छूट से लेकर टैक्स बेनिफिट की सुविधाएं मिल जाती है।हालांकि टैक्स छूट के लिए जरुरी है कि कंपनी का गठन एक अप्रैल 2016 के बाद हुआ हो। उसे यह छूट कुल तीन साल एक अप्रैल 2019 तक ही मिल सकती है।
नई दिल्ली. मोदी सरकार ने 400 से ज्यादा स्टार्टअप को टैक्स बेनिफिट देने से इंकार कर दिया है। सरकार ने इन सभी स्टार्टअप के एप्लीकेशन को रिजेक्ट कर दिया है। सरकार को लगता है कि रिजेक्ट हुए स्टार्टअप टैक्स बेनिफिट की क्राइटेरिया पूरी नहीं करती है। इसकी वजह से उन्हें टैक्स बेनिफिट का फायदा नहीं दिया जा रहा है। मोदी सरकार ने देश में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए टैक्स छूट का प्रावधान किया है। जिसके तहत एक अप्रैल 2016 के बाद गठित हुए स्टार्टअप को टैक्स बेनिफिट मिलता है। दिसंबर में हुए इंटरमिनिस्ट्रियल बोर्ड मीटिंग में 407 कंपनियों द्वारा भेजे गए प्रपोजल में से 401 के एप्लीकेशन रिजेक्ट किए गए हैं।
केवल 4 स्टार्टअप को टैक्स बेनिफिट का अप्रूवल
दिसंबर में हुई 21वीं इंटरमिनिस्ट्रियल बोर्ड में केवल 4 स्टार्टअप को टैक्स बेनिफिट के लिए सेलेक्ट किया गया है। जबकि 2 स्टार्टअप के एप्लीकेशन को अगली मीटिंग में फिर से रिव्यू किया जाएगा। इसके अलावा 401 स्टार्टअप के एप्लीकेशन को रिजेक्ट किया गया है। साथ ही मीटिंग में पहले से टैक्स बेनिफिट के लिए रिजेक्ट हो चुके 369 कंपनियों को स्टार्टअप का दर्जा बरकरार रखा गया है।
क्यों रिजेक्ट हो रहे एप्लीकेशन
सूत्रों के अनुसार नियमों के अनुसार एक अप्रैल 2016 के बाद बनी कंपनियों को ही स्टार्टअप का दर्जा मिल सकता है। साथ ही ऐसी कंपनियां ही टैक्स बेनिफिट के लिए अप्लाई कर सकती है। नियमों के प्रति कम जानकारी होने की वजह से कई कंपनियां एक अप्रैल 2016 से पहले गठित होने के बावजूद अप्लाई कर रही है। इसके अलावा स्टार्टअप बेनिफिट लेने के लिए फ्रॉड के भी मामले सामने आए हैं। इन वजहों से ही एप्लीकेशन रिजेक्शन बढ़ा है।
नवंबर की मीटिंग में फ्रॉड का हुआ था खुलासा
स्टार्टअप इंडिया स्कीम के तहत स्टार्टअप कहलाने और उसके तहत टैक्स बेनिफिट जैसी फायदे लेने के लिए कंपनियां एप्लीकेशन देनी होती है। कंपनी के एप्लीकेशन को एक इंटर मिनिस्ट्रियल बोर्ड रिव्यू करता है। जिसके आधार पर उसे स्टार्टअप का दर्जा और टैक्स बेनिफिट जैसे फायदे मिलते हैं। डीआईपीपी के तहत नवंबर में हुई बोर्ड मीटिंग मे इस बात का खुलासा हुआ है कि कई कंपनियां ऐसी हैं जो स्टार्टअप का दर्जा लेने के लिए पात्र नहीं है, फिर भी उन्हें उसका दर्जा मिल गया है। कई कंपनियों ने अपनी सब्सिडियरी बनाकर एक नई कंपनी को स्टार्टअप के रुप में रजिस्टर्ड कराया था। जिसमें भारतीय कंपनियों के साथ-साथ विदेशी कंपनियां भी शामिल हैं। नियमों के अनुसार इस तरह से बनाई गई सब्सिडियरी कंपनी को स्टार्टअप का दर्जा नहीं मिल सकता है। इसका खुलासा होने के बाद उनके एप्लीकेशन रिजेक्ट किए गए ।
स्टार्टअप दर्जा मिलने से क्या मिलता है फायदा
स्टार्टप इंडिया स्कीम के तहत ऐसी कंपनियां को स्टार्ट अप इंडिया का दर्जा मिलता है, जो इन्नोवेशन, नए प्रोडक्ट डेवलपमेंट और सर्विस के लिए काम करती है। इसके तहत कंपनी का गठन 7 साल से ज्यादा पुराना नहीं होना चाहिए।वहीं बॉयो टेक्नोलॉजी सेक्टर की कंपनियों के लिए यह लिमिट 10 साल है। ऐसी कंपनियों को स्टार्टअप का दर्जा मिल सकता है, बशर्ते की उनका टर्नओवर 25 करोड़ रुपए सालाना से ज्यादा न हो। स्टार्टअप का दर्जा मिलने से कंपनियों को लेबर कानून में छूट से लेकर टैक्स बेनिफिट की सुविधाएं मिल जाती है।हालांकि टैक्स छूट के लिए जरुरी है कि कंपनी का गठन एक अप्रैल 2016 के बाद हुआ हो। उसे यह छूट कुल तीन साल एक अप्रैल 2019 तक ही मिल सकती है।

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