Allahabad High Court : कम्प्यूटराइजेशन से पारदर्शिता तथा जवाबदेही भी बढ़ेगी, वाई-फाई से लैस होगा लखनऊ हाईकोर्ट कैंपस...मुख्य न्यायाधीश
डिजिटल युग में अब रजिस्ट्री और वादी भी इसके महत्वपूर्ण अंग हो गए हैं-मदन बी लोकुर। कम्प्यूटराइजेशन से पारदर्शिता तथा जवाबदेही भी बढ़ेगी, वाई-फाई से लैस होगा लखनऊ हाईकोर्ट कैंपस-मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद उच्च न्यायालय
इलाहाबाद 19 अगस्त, 2017। सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी के इंचार्ज जस्टिस मदन बी लोकुर ने कहा है कि, पहले बेंच और बार को जूडिशरी के दो पहिए कहा जाता था। लेकिन अब समय बदल गया है। डिजिटल युग में अब रजिस्ट्री और वादी भी इसके महत्वपूर्ण अंग हो गए हैं। इसलिए अब जूडिशियरी चार पहियों वाली गाड़ी की तरह हो गयी है। चीफ जस्टिस कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ बेंच की एक-एक ई-कोर्ट का उद्घाटन करत हुए जस्टिस लोकुर ने बताया कि, जूडिशरी में बदलाव की यह एक शुरूआत है। आने वाले समय में देश के सभी हाईकोर्ट में ई-कोर्ट स्थापित होंगे। यही नहीं भविष्य में मोबाइल एप के अधिक से अधिक प्रयोग पर भी हम काम कर रहे हैं। जूडिशरी को अधिक से अधिक डिजिटल और पेपरलेस बनाने के लिए उनकी अध्यक्षता वाली कमिटि ने 700 करोड़ जारी किए हैं। हालांकि अब तक इसका सबसे अधिक फायदा इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिया है। जस्टिस लोकुर ने कहा कि, न्याय त्वरित गति से हो और वादी को इसका फायदा मिले तभी डिजिटाइजेशन का लाभ होगा। उन्होंने कहा कि सिर्फ ई-कोर्ट स्थापित हो जाने से जस्टिस डिलीवरी सिस्टम तेज नहीं हो जाएगा। जब तक इससे जुड़े लोग भी इसका सपोर्ट न करें। कहा कि, जूडिशल डिलीवरी सिस्टम में कम्प्यूटराइजेशन से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसकी शुरूआत कर एक और ऐतिहासिक क्रान्ति की पहल की है। यह सिर्फ न्यायपालिका ही नहीं बल्कि जजों, वकीलों, रजिस्ट्री और वादकारी सभी के लिए लाभदायकहै। जस्टिस लोकुर ने कहा कि, तकनीक का इस्तेमाल त्वरित न्याय देने की दिशा में काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। अधीनस्थ न्यायपालिकाओं को नेशनल डाटा ग्रिड से जोड़ा जायेगा। उन्होंने मोबाइल एप्लीकेशन के महत्वपर प्रकाश डालते हुए कहा कि, यह भविष्य में मुकदमों से संबंधित सूचनाओं को उपलब्ध कराने की दिशा में काफी सहायक है। वकीलों को मुकदमों की जानकारी ई-मेल और एसएसमएस के जरिये प्राप्त होगी। कोर्ट की मोबाइल एप को 70 हजार लोग डाउनलोड कर चुके हैं। कहा कि ई-कोर्ट से न सिर्फ पर्यावरण बचेगा बल्कि समय और मैनपावर भी बचेगी। कहा कि, जूडिशल डिलीवरी सिस्टम पर रिसर्च हो रहा है। यह डिजिटाइजेशन के कारण ही संभव हुआ है। कार्यक्रम में जस्टिस दिलीप गुप्ता, जस्टिस तरूण अग्रवाल, मुख्य सचिव राजीव कुमार , महाधिवक्ता राघवेन्द्र सिंह, प्रमुख सचिव सूचना अवनीश अवस्थी, बार के अध्यक्ष अनिल तिवारी आदि मौजूद रहे।
*वाई-फाई से लैस होगा लखनऊ हाईकोर्ट कैंपस*
चीफ जस्टिस डीबी भोसले ने बताया कि, इलाहाबाद हाईकोर्ट कैंपस को पूरी तरह वाई-फाई से लैस किया जा चुका है। अगले चरण में लखनऊ बेंच कैंपस को भी वाई-फाई से लैस किया जाएगा। कहा कि, सिर्फ काजलिस्ट की प्रिंटिंग बंद करने से ही हाईकोर्ट करीब तीन करोड़ हर वर्ष बचा सकेगा। इसके लिए प्रयास चल रहे है। काजलिस्ट को मेल पर भेजने और मोबाइल पर मैसेज भेजने के साथ इसकी शुरूआत हो चुकी है। जैसे ही यह सिस्टम फुलप्रूफ हो जाएगा। काजलिस्ट की प्रिंटिंग बंद कर दी जाएगी। इसके साथ ही हाईकोर्ट में अगले महीने से सीआईएस-1.0 शुरू हो जाएगा। इससे वादकारियों और वकीलों को केस का स्टेटस जानने में काफी मदद मिलेगी। यही नहीं, केस की सुनवाई की अद्यतन जानकारी मिलेगी और आर्डर भी जाना जा सकेगा। कहा कि, ई-कोर्ट डिजिटाइजेशन की ओर बढ़ रही न्यायपालिका के लिए पहले कदम की तरह है। भविष्य में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में तेजी से डिजिटाइजेशन शुरू किया जाएगा.
इलाहाबाद 19 अगस्त, 2017। सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी के इंचार्ज जस्टिस मदन बी लोकुर ने कहा है कि, पहले बेंच और बार को जूडिशरी के दो पहिए कहा जाता था। लेकिन अब समय बदल गया है। डिजिटल युग में अब रजिस्ट्री और वादी भी इसके महत्वपूर्ण अंग हो गए हैं। इसलिए अब जूडिशियरी चार पहियों वाली गाड़ी की तरह हो गयी है। चीफ जस्टिस कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ बेंच की एक-एक ई-कोर्ट का उद्घाटन करत हुए जस्टिस लोकुर ने बताया कि, जूडिशरी में बदलाव की यह एक शुरूआत है। आने वाले समय में देश के सभी हाईकोर्ट में ई-कोर्ट स्थापित होंगे। यही नहीं भविष्य में मोबाइल एप के अधिक से अधिक प्रयोग पर भी हम काम कर रहे हैं। जूडिशरी को अधिक से अधिक डिजिटल और पेपरलेस बनाने के लिए उनकी अध्यक्षता वाली कमिटि ने 700 करोड़ जारी किए हैं। हालांकि अब तक इसका सबसे अधिक फायदा इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिया है। जस्टिस लोकुर ने कहा कि, न्याय त्वरित गति से हो और वादी को इसका फायदा मिले तभी डिजिटाइजेशन का लाभ होगा। उन्होंने कहा कि सिर्फ ई-कोर्ट स्थापित हो जाने से जस्टिस डिलीवरी सिस्टम तेज नहीं हो जाएगा। जब तक इससे जुड़े लोग भी इसका सपोर्ट न करें। कहा कि, जूडिशल डिलीवरी सिस्टम में कम्प्यूटराइजेशन से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसकी शुरूआत कर एक और ऐतिहासिक क्रान्ति की पहल की है। यह सिर्फ न्यायपालिका ही नहीं बल्कि जजों, वकीलों, रजिस्ट्री और वादकारी सभी के लिए लाभदायकहै। जस्टिस लोकुर ने कहा कि, तकनीक का इस्तेमाल त्वरित न्याय देने की दिशा में काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। अधीनस्थ न्यायपालिकाओं को नेशनल डाटा ग्रिड से जोड़ा जायेगा। उन्होंने मोबाइल एप्लीकेशन के महत्वपर प्रकाश डालते हुए कहा कि, यह भविष्य में मुकदमों से संबंधित सूचनाओं को उपलब्ध कराने की दिशा में काफी सहायक है। वकीलों को मुकदमों की जानकारी ई-मेल और एसएसमएस के जरिये प्राप्त होगी। कोर्ट की मोबाइल एप को 70 हजार लोग डाउनलोड कर चुके हैं। कहा कि ई-कोर्ट से न सिर्फ पर्यावरण बचेगा बल्कि समय और मैनपावर भी बचेगी। कहा कि, जूडिशल डिलीवरी सिस्टम पर रिसर्च हो रहा है। यह डिजिटाइजेशन के कारण ही संभव हुआ है। कार्यक्रम में जस्टिस दिलीप गुप्ता, जस्टिस तरूण अग्रवाल, मुख्य सचिव राजीव कुमार , महाधिवक्ता राघवेन्द्र सिंह, प्रमुख सचिव सूचना अवनीश अवस्थी, बार के अध्यक्ष अनिल तिवारी आदि मौजूद रहे।
*वाई-फाई से लैस होगा लखनऊ हाईकोर्ट कैंपस*
चीफ जस्टिस डीबी भोसले ने बताया कि, इलाहाबाद हाईकोर्ट कैंपस को पूरी तरह वाई-फाई से लैस किया जा चुका है। अगले चरण में लखनऊ बेंच कैंपस को भी वाई-फाई से लैस किया जाएगा। कहा कि, सिर्फ काजलिस्ट की प्रिंटिंग बंद करने से ही हाईकोर्ट करीब तीन करोड़ हर वर्ष बचा सकेगा। इसके लिए प्रयास चल रहे है। काजलिस्ट को मेल पर भेजने और मोबाइल पर मैसेज भेजने के साथ इसकी शुरूआत हो चुकी है। जैसे ही यह सिस्टम फुलप्रूफ हो जाएगा। काजलिस्ट की प्रिंटिंग बंद कर दी जाएगी। इसके साथ ही हाईकोर्ट में अगले महीने से सीआईएस-1.0 शुरू हो जाएगा। इससे वादकारियों और वकीलों को केस का स्टेटस जानने में काफी मदद मिलेगी। यही नहीं, केस की सुनवाई की अद्यतन जानकारी मिलेगी और आर्डर भी जाना जा सकेगा। कहा कि, ई-कोर्ट डिजिटाइजेशन की ओर बढ़ रही न्यायपालिका के लिए पहले कदम की तरह है। भविष्य में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में तेजी से डिजिटाइजेशन शुरू किया जाएगा.

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