आधुनिक राजनीति में शहीदों के सोच का भारत गायब .....रक्षा यथार्थ
इलाहाबाद : सामान्य जीवन में जब असमानता की चीखें समाज के हर वर्ग को यह एहसास कराती है कि हम सब भिन्न भिन्न है।हमारा कर्तव्य सिर्फ नफरत करना है और हमें अपनी इसी नफरत से समाज को बांटना है। हम सब किससे सामान्य जीवन की परिकल्पना कर रहे हैं? जबकि सभी जानते है कि राजनितिक रूपी विष का समुद्र मंथन चल रहा है यहाँ देवता व राक्षस आपस मे मिलकर देश के टुकड़े टुकड़े कर रहे हैं। और हमारे शहीदेव के सपने का भारत गायब हो गया है .
उपर्युक्त बात कहते हुए समाजसेविका रक्षा यथार्थ ने एक वार्ता में बताया कि ऐसे ही एक टुकड़े से एक ऐसी परिधि की रचना होती जा रही है जो हम सभी को एक कटघरे में खड़ा कर देती है, वह परिधि है आधुनिक राजनीति में अहिंसा का सहारा लेते हुए साम दाम दंड और भेद का प्रयोग करते वो लोग जो रात दिन जनता को लूट रहे हैं । आज समाज को जातिवाद, ईश्वरवाद, धर्मवाद में उलझा कर अपना हित साधा जा रहा है यह स्पष्ट सी बात आधुनिक पीढ़ी को समझ में नही आ रही, और जिन्हें समझ मे आती है वह आत्ममंथन से कोसो दूर है.. आज सभी अपना भला देख रहे हैं, जिस प्रकार स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले अपने राज्यों की सुरक्षा के लिए राजा लड़ा करते थे और वही जीत उनकी उपलब्धि हुआ करती थी वैसे ही आज का समाज सिर्फ अपनी रोटी बचाने मे लगा है।
रक्षा यथार्थ ने आगे कहा कि वर्तमान सरकार में लगता है कि चीन से सांठ गांठ कर रखी है कि वह कभी भी हममें घूसकर हमारे ही लोगों के द्वारा हमें समाप्त कर सकता है। हमें चाहिए कि किसी व्यक्ति विशेष की छवि से इतने अंधे न हो जाये हम सब की गलत नीतियों को अनदेखा करते रहे।
किसी व्यक्ति विशेष का यह राष्ट्र नही है जिसे अपनी मनमानी करने का अधिकार प्रदान कर दिया जाये , हम सभी को अपनी ताकत का एहसास होना चाहिए, हमारे ऊपर कोई तानाशाह नही है बल्कि हम ही सरकार है यह एहसास उन सभी को कराना होगा जिनकी मजबूती सिर्फ बंदूक की नोक पर टिकी है।
अंत में रक्षा ने कहा कि अपने राष्ट्र को समझिये, हमारे राष्ट्र के महापुरुषों ने अपना लहू बहाया और हमे नया भारत दिया है। वो भारत जो हमें मिला वह ही नया भारत था और कोई नया भारत हो ही नही सकता, झूठ की बुनियाद पर नव भारत की परिकल्पना तैयार करने वाले रोजगार तैयार करते तो नव भारत की छवि प्रतीत होती किन्तु वह भूल गये हमारा नया भारत रक्त की लकीरो से बना हुआ है, नया भारत कड़ी तपस्या से बना वह पत्थर हो जो अडिग है।
उपर्युक्त बात कहते हुए समाजसेविका रक्षा यथार्थ ने एक वार्ता में बताया कि ऐसे ही एक टुकड़े से एक ऐसी परिधि की रचना होती जा रही है जो हम सभी को एक कटघरे में खड़ा कर देती है, वह परिधि है आधुनिक राजनीति में अहिंसा का सहारा लेते हुए साम दाम दंड और भेद का प्रयोग करते वो लोग जो रात दिन जनता को लूट रहे हैं । आज समाज को जातिवाद, ईश्वरवाद, धर्मवाद में उलझा कर अपना हित साधा जा रहा है यह स्पष्ट सी बात आधुनिक पीढ़ी को समझ में नही आ रही, और जिन्हें समझ मे आती है वह आत्ममंथन से कोसो दूर है.. आज सभी अपना भला देख रहे हैं, जिस प्रकार स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले अपने राज्यों की सुरक्षा के लिए राजा लड़ा करते थे और वही जीत उनकी उपलब्धि हुआ करती थी वैसे ही आज का समाज सिर्फ अपनी रोटी बचाने मे लगा है।
रक्षा यथार्थ ने आगे कहा कि वर्तमान सरकार में लगता है कि चीन से सांठ गांठ कर रखी है कि वह कभी भी हममें घूसकर हमारे ही लोगों के द्वारा हमें समाप्त कर सकता है। हमें चाहिए कि किसी व्यक्ति विशेष की छवि से इतने अंधे न हो जाये हम सब की गलत नीतियों को अनदेखा करते रहे।
किसी व्यक्ति विशेष का यह राष्ट्र नही है जिसे अपनी मनमानी करने का अधिकार प्रदान कर दिया जाये , हम सभी को अपनी ताकत का एहसास होना चाहिए, हमारे ऊपर कोई तानाशाह नही है बल्कि हम ही सरकार है यह एहसास उन सभी को कराना होगा जिनकी मजबूती सिर्फ बंदूक की नोक पर टिकी है।
अंत में रक्षा ने कहा कि अपने राष्ट्र को समझिये, हमारे राष्ट्र के महापुरुषों ने अपना लहू बहाया और हमे नया भारत दिया है। वो भारत जो हमें मिला वह ही नया भारत था और कोई नया भारत हो ही नही सकता, झूठ की बुनियाद पर नव भारत की परिकल्पना तैयार करने वाले रोजगार तैयार करते तो नव भारत की छवि प्रतीत होती किन्तु वह भूल गये हमारा नया भारत रक्त की लकीरो से बना हुआ है, नया भारत कड़ी तपस्या से बना वह पत्थर हो जो अडिग है।

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